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नियमशर्तें :

 

 

 

1.  मेरे क्लीनिक में दो प्रकार का उपचार होता है : –  (अ ) – कन्ष्टिच्युश्नल : – सभी बिमारियों का एक साथ पूरे शरीर का उपचार जो की स्थायी होता है ,   (ब ) – थेराप्युतिकल : – एक बार में केवल किसी एक रोग का उपचार जो की स्थायी नहीं होता है |

 

2.  मेरे क्लीनिक में दो प्रकार का फीस लगता है ( कृपया फीस के लिए सर्विस पेज को देखने का कष्ट करें|):- (अ ) – केसटेकिंग फीस ( पहली बार लगाने वाला फीस ),     (ब ) – फ़ॉलोअप फीस ( रेगुलर या दूसरी व प्रत्येक बार लगने वाला फीस |

 

3.  मेरे क्लीनिक में फ़ॉलोअप फीस केवल पाँच दिन के लिए मान्य होता है |

 

4.  मेरे क्लीनिक में सामान्य रोगी फीस और विशिष्ट रोगी ( पुराने, जटिल, असाध्य या प्राण घातक रोग से ग्रसित रोगी ) फीस अलग – अलग होता है |

 

5.  यदि कोई रोगी बीच में ही मेरे क्लीनिक से उपचार किसी भी कारण से बन्द करना चाहता है तो इसकी सूचना क्लीनिक में आकर अवश्य देने का कष्ट करें |

 

6.  यदि सामान्य फीस वाला रोगी किसी भी कारण से अपना उपचार 90 दिन बन्द रहने के पश्चात् पुनः प्रारम्भ करना चाहता है तो उसे फिर से पूरा केसटेकिंग फीस देना होगा और उपचार फिर से प्रारम्भ माना जायेगा |

 

7.  यदि विशिष्ट फीस वाला रोगी किसी भी कारण से अपना उपचार 90 दिन बन्द रहने के पश्चात् पुनः प्रारम्भ करना चाहता है तो उसे वर्तमान समय में प्रभावी विशिष्ट रोगी केसटेकिंग फीस का आधा फीस फिर से देना होगा और उपचार फिर से प्रारम्भ माना जायेगा |

 

8.  यदि कोई भी रोगी मेरे क्लीनिक से लगातार नियमित उपचार ले रहा है तो उसे केवल एक वर्ष तक (उपचार प्रारम्भ की तिथि से ) औषधि मूल्य के साथ रेगुलर फीस देना होगा और उसके पश्चात् रोगी के ठीक होने तक केवल औषधि मूल्य को ही देना पड़ेगा |

 

9.  उपचार के दौरान “श्रीजा होमियो क्लीनिक” द्वारा रोगी के उपचार के लिए लिया गया कोई भी रुपया – पैसा , चाहे वह कोई भी फीस हो अथवा औषधि का मूल्य हो किसी भी स्थिति में किसी भी प्रकार से किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था को “श्रीजा होमियो क्लीनिक” या “श्रीजा होमियो क्लीनिक” के डॉक्टर या “श्रीजा होमियो क्लीनिक” के स्टॉफ किसी भी स्थिति में देने के लिए बाध्य नहीं होंगे |

 

10.                    कृपया “श्रीजा होमियो क्लीनिक”, “श्रीजा होमियो क्लीनिक” के डॉक्टर या “श्रीजा होमियो क्लीनिक” के किसी भी स्टॉफ से किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार ना करें और ना ही किसी भी प्रकार का नुकसान करें | यदि किसी व्यक्ति अथवा रोगी अथवा रोगी से सम्बंधित व्यक्ति के द्वारा किया जाता है तो सम्बंधित व्यक्ति को ही संपूर्ण नुकसान की भरपाई या हुए नुकसान के पूरे खर्च का वहन करना होगा | और यदि सम्बंधित व्यक्ति हुए नुकसान की भरपाई या खर्च का वहन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध क़ानूनी कार्यवाई की जा सकती है |

 

                                                         धन्यवाद !